शिक्षा

शिक्षा के द्वारा मानव का बौद्धिक विकास होता है। उचित-अनुचित का ज्ञान होता है। विकास की अवस्थाओं की आधारशिला शिक्षा है। समाज या राज्य शि

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छायावाद

द्विवेदी युग के पश्चात हिंदी साहित्य में जो कविता धारा प्रवाहित हुई, वह छायावादी कविता के नाम से प्रसिद्ध हुई। वस्तुतः छायावाद इस युग के

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महाराणा प्रताप

स्वाभिमानी और स्वतंत्रता के पुजारी : महाराणा प्रताप अपने जीवन को मातृभूमि की स्वतंत्रता रूपी बलिवेदी पर सहर्ष निछावर करे वाले भारतीय सपूतों में महरान प्रताप का नाम अग्रणी है

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स्वामी विवेकानंद

“आध्यात्म – विद्या, भारतीय दर्शन एवं धर्म के बिना विश्व अनाथ हो जाएगा ।” इस प्रकार की दृढ़ भावना रखने वाला परतंत्र भारत का ही

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महावीर

महावीर स्वामी का अवतरण  देश की धार्मिकता कर्मकांड की प्रबलता से विकृत्त थी । पशुओ और नर पुत्रों के रक्त से यज्ञमें आहुतिया दी जाती थी । देव

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एक फकीर बड़ा तोते बाज़ था।  वह तोता बाजार से खरीद कर लाता और उसे भली प्रकार शिक्षित कर  अमीर उमराव को देकर द्रव्य उपार्जन

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बुल्लेशाह

पाच दरियाओं ( नदियों) के प्रवाहों से सींची गई पंजाब की मिट्टी में जनमे, विश्वविख्यात सूफी संत बुल्लेशाह धार्मिक जड़ता और पाखंड के कट्टर विरोधी

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रामकृष्ण परमहंस बचपन में गदाधर कहलाए इस बालक का जन्म 18 फरवरी, 1836 को बंगाल प्रांत के एक छोटे से गाँव कुमारपुकुर में एक ब्राह्मण

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अरविंद

नियति स्वयं मानवजाति के भाग्य का इतिहास लिखती है । इस कथन पर यों तो पूरे भारत में विश्वास करनेवाले अधिकांश लोग मिल जाएँगे, किंतु

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